Thursday, 13 July 2017

मुस्लिम दुनिया में क़त्ले आम होगा




     जब यहूदी सलेबियों के साथ मिल कर मस्जिदे अक़सा को शहीद कर देंगे और अरब हुक्मरान आँखों पर पट्टी बांधे और कान में रुई ठूंसे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे तो फिलिस्तीनी मुसलमानों और अरब अवाम का खून खौल उठेगा | वह बतौरे एहतिजाज उठ खड़े होंगे | पूरे मश्रीके वुस्ता और दुनिया में जहां मुसलमान आबाद हैं जबरदस्त एहतिजाजी मुज़ाहिरे होंगे वहां के सलेब व यहूद प्रस्त हुक्मरान मुसलमानों के एहतिजाज को पूरी क़ुव्वत से दबाने की कोशिश करेंगे | इसमें ज़बरदस्त क़त्ले आम होगा | मुस्लिम दुनिया में सूरतेहाल यह होगी कि मसलमानों का यहूदियों के ख़िलाफ़ जोश व ग़ज़ब जो 1945 से खौल रहा है वह आतिश फिशां की तरह फट जायेगा और उसके इस लावे में तमाम अरब तानाशाह, बादशाह और मगरिब प्रस्त अय्याश हुक्मरान बह जायेंगे |
     अमरीका रूस और यूरोप वाले अपने पिटठुओं को बचाने के लिए दौड़ पड़ेंगे | उनसे भी मुसलमानों का टकराव होगा | उस वक़्त दुनिया भर के सच्चे मुसलमान और हक़ प्रस्त ग़ैर मुस्लिम एक पलेटफार्म पर जमा हो जायेंगे | तमाम शैतानी और तागुती कुव्वतें बशमूल दज्जाल को ख़ुदा मानने वाले मुस्लिम हुक्मरान यहूद व नसारा के साथ हक़ की आवाज दबाने के लिए एक ही सफ में खड़े होंगे | यह जंग इतनी ख़तरनाक सूरत इख़्तियार कर लेगी कि इसमें ज़बरदस्त तबाही मचेगी | इस जंग को बाईबिल में ‘आरमागीडोंग’ कहा गया है |

कुस्तुनतुनिया (स्तंबुल) पर सलेबियों का कब्ज़ा 

     आख़िरी तुर्क ख़लीफा अब्दुल मजीद को यहूदी व सलेबी तहरीक (Freemason) के तुर्क मिम्बरान ने 1924 में उखाड़ फेंका था और तुर्की को एक सेकुलर स्टेट बना दिया था जहां इस्लाम का नाम लेना भी सज़ाए मौत की वजह बनता था | मगरिब  नवाज़ मुस्तफ़ा कमाल ने तुर्कों से दीने इस्लाम को मिटाने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन वह और उनके वारिसिन कामयाब न हो सके | 1994 में वहां इस्लाम पसंद लीडरों को सियासी गल्बा हासिल हुआ और लोगों का अपने दीन की तरफ़ रुझान बढ़ा |
     3 साल क़ब्ल तुर्क वज़ीरे आज़म ने यूरोपिन इकोनॉमिक फार्म के इजलास में इसराइल के सदर और उसके हलीफ सलेबियों को इस बात पर डाट दिलाई कि वह इसराइल के निहत्थे फिलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ मज़ालिम की सताइश करते हैं | तय्यत उर्दगान ने गैरते ईमानी क मुज़ाहिरा किया और वह इजलास का बाईकाट करके तुर्की वापस आ गये |
     आप को बता दें कि तुर्क सुल्तान मोहम्मद फ़ातेह ने 1457 में कुस्तुनतुनिया को फ़तेह किया था | यह शहर यूरोप में वाकेअ है और आज इसे स्तंबुल के नाम से जाना जाता है | इस शहर का नाम रोमन बादशाह कोन्स टनटाइन के नाम पर रखा गया था और उसकी इसाई दुनिया में बड़ी इज्ज़त थी |
     अहले रूम (यूरोप) को स्तंबुल सीने में फ़ांस की तरह महसूस होता है और वह कतई नहीं चाहते कि उनकी अजमत का निशान रहा यह शहर मुसलमानों के कब्ज़े में हो |
     पहली जंग अज़ीम के दौरान बरतानिया, फ़्रांस, आस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनान ने मिल कर तुर्की पर हमला किया लेकिन अल्लाह की मदद तुर्कों को हासिल थी और तुर्कों ने बड़ी बहादुरी से सलेबियों को शिकस्त देकर अपने मुल्क को बचा लिया था | इस शिकस्त को इंग्लैण्ड और फ़्रांस आज तक नहीं भूले हैं |
     शाम और इराक़ में अपनी फ़ौजें उतार कर और तुर्की में रह रहे कुर्दों को भड़का कर अहले यूरोप तुर्की के ख़िलाफ़ महाज़ को मजबूत करना चाहते हैं | इस तरह बवक्ते ज़रूरत तुर्की पर हमला करने का मौक़ा मिल जायेगा | रूस, फ़्रांस, इंग्लैण्ड और इसराइल तुर्की के इर्दगिर्द घेरा तंग कर रहे हैं |
     स्तंबुल (कुस्तुनतुनिया)पर कब्ज़ा करने के लिए सलेबी फ़्रांस बहाने तलाश कर रहा है | उसने 1920 में आरमीनिया बाशिन्दों के क़त्ले आम का बहाना बना कर तुर्की हुकूमत से माफ़ी मांगने का मुतालबा किया है जबकि फ़्रांस सामराजियत के दिनों में 5 लाख अल-जिरियाई मुसलमानों के क़त्ले आम में मुलव्विस था |
     आप ख़ुद अंदाजा कर सकते हैं कि किस तरह दज्जाल उन मुस्लिम मुल्को के ख़िलाफ़ ताना बाना बन रहा है जहां से उसे ज़ाहिर होना है और जो उसके ख़िलाफ़ उठ खड़े होंगे |
खिंज़िर का नाम Pig से Swine क्यों

            हालाँकि खिंज़िर को यहूदियत, ईसाइयत और इस्लाम में नापाक और गन्दा जानवर कहा गया है | इसका गोश्त खाना हराम है लेकिन यहूदी इसका गोश्त बहुत पंसद करते हैं | वह उसके गोश्त की वसीअ पैमाने पर तिजारत करते हैं और भारी मुनाफ़ा कमाते हैं | लफ्ज़ Pig (सुअर) अंग्रेजी ज़बान में उर्दू की तरह गाली के लिए भी इस्तेमाल होता है | चुनांचे यहूदियों के नज़दीक यह एक मासूम जानवर है जिससे लोगों को गिज़ा मिलती है उन्होंने इसका नाम Pig से बदल Swine रख दिया है |
      डर-असल सुअर के गोश्त की बड़ी अजीब तासीर है | इसका गोश्त इस्तेमाल करने वाले के अन्दर शर्म व हया खत्म हो जाती है और वह शहवत प्रस्त हो जाता है | जानवरों मेस सबसे ज्यादा शहवत सुअर और चूहे में होती है | खिंज़िर मादा हो या नर हर वक़्त गल्बा-ए-शहवत में मुबतिला रहते हैं | इसी लिए दुनिया भर के शहवत प्रस्त ज़िनाकारी से क़ब्ल शराब के साथ खिंज़िर का गोश्त खाते हैं और साहिले समंदर, पार्कों और पब्लिक प्लेस पर ज़िनाकारी करते हैं | दुनिया को शहवत की गन्दगी में लुथेड़ने वाले यहूदियों ने उसका गोश्त, चरबी और दीगर चीज़े घर – घर पहुँचाने का ज़िम्मा ले लिया है | मैक – डोनाल्ड और के. एफ. सी. के ज़रिया मुस्लिम घरानों में भी यह खाया जा रहा है और शायद यही वजह है कि हज़रत ईसा अलैहि० दोबारा दुनिया में तशरीफ लाने के बाद सलेब को तोड़ देंगे और खिंज़िर को मर डालेंगे |

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